बिना खेतों के ही घर की छत पर उगा ली टनों सब्ज़ियाँ

बिना खेतों के ही घर की छत पर उगा ली टनों सब्ज़ियाँ
"ऊंचे ख्वाबों की शुरुआत ज़मीं से होती है, शिद्दत से जो करते हैं मेहनत, कामयाबी उनके क़दमों में होती है।" और आज हम आपका परिचय कराएँगे ऐसे किसानों से जिन्होंने IIT से पढ़ाई कर बजाय नौकरी करने के, खेती को गले लगाया और आज इसी पेशे से शोहरत हासिल कर रहे हैं। ये ऐसे किसान हैं जो खेतों में नहीं, अपनी छत पर ही सब्ज़ियाँ उगाते हैं और वो भी 10-20 किलो नहीं, टनों में। इसमें कोई अचरज की कोई बात नहीं, क्योंकि जहाँ चाहत है, वहीँ राहत होती है। आज इनके हौसलों की उड़ान देखते ही बनती है।

 IIT खड़गपुर के ग्रेजुएट्स कौस्तभ खरे और साहिल पारेख ने मात्र 19 हज़ार रुपये लगाकर घर की छत पर ही सब्ज़ियाँ उगाने का काम शुरू किया। अपनी इस कंपनी का नाम इन्होने रखा "खेतीफाई"। आज इसी से वे सब्ज़ियाँ उगाकर अच्छी-खासी कमाई कर लेते हैं। IIT से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने भविश्व को एक नयी उड़ान देने के लिए कौस्तभ और साहिल दिल्ली आ गए। यहाँ इन्होने भारत सरकार द्वारा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के अंतर्गत ग्रीन फील्ड स्मार्ट सिटी के डिज़ाइन पर काम किया। इस बीच इन्हें कई राज्यों के लैंड फिलिंग साइट्स का दौरा करने का भी मौका मिला। इन साइटों पर बड़े पैमानों में उगाये जाने वाले सब्ज़ियों की खेती देखर इन्हें काफी चिंता हुयी। क्योंकि तमाम गंदगियों में उगाई जाने वाली ये सब्ज़ियाँ बड़ी ही हानिकारक होती हैं। इसी बात ने इन्हें खुद ही सब्ज़ियों को उगाने की लिए प्रेरित किया।

और जिस मकान में वे किराये पर रहते थे, उसी की छत पर इन्होने अपनी परियोजना बनाई। 15x20 की छोटी सी छत को इन दोनों दोस्तों ने एक खेत का रूप दिया। उसे इन्होने पूरी तरह वाटर-प्रूफिंग किया फिर जैविक खाद और कोकोपीट मिलाकर गमले तैयार किये जो की वजह में भी कम थे। यहीं इन्होने जैविक रूप से सब्ज़ियाँ उगाने का प्रयोग शुरू किया। इस टेरेस गार्डन की मिट्टी, खाद और कीटनाशकों पर कौस्तब और साहिल ने करीब डेढ़ साल तक प्रयोग किये। मिट्टी का कम से कम प्रयोग कर सिंचाई के आधुनिक तरीकों को अपनाया ताकि छतों पर भी कम से कम भर पड़े। तमाम मेहनत की बाद साल 2016 में इन्हें सफलता मिली। इसने इनके विश्वास को बहुत प्रोत्साहित किया। साथ ही इन्हें विश्वास हो गया की सही देख-रेख से किसी भी मौसम और स्थिति में सब्ज़ियाँ बड़ी ही आसानी से उगाई जा सकती हैं।

 अपनी इस सफलता से प्रोत्साहित हो आखिर इन्होने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया और खेती को ही बढ़ावा देने का फैसला कर लिया और अपने इसी इरादे से "खेतीफाई" नाम की कंपनी बनाई। गुरुग्राम में शुरू किये टेरेस गार्डन की इस खेती में आज ये विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियाँ उगा कर अच्छा खासा मुनाफा कमा लेते हैं। कौस्तभ और साहिल के इस प्रयास ने आस-पास लोगों को भी टेरेस गार्डन के लिए प्रोत्साहित किया है। इन दोनों दोस्तों का मानना है की शहरी वातारवरण में रहते-रहते लोग खेती-बाड़ी से दूर होने लगे हैं। अपने प्रयास से ये लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि वे अपने शौख को पूरा करते करते बचत भी कर सकें।

ये चाहते हैं की हर शहर अपनी खाद्य व्यवस्था पर खुद ही नियंत्रण रखे। हमारे खेती प्रधान देश की बड़ी ही विचित्र विडम्बना ये है की एक ओर जहाँ किसान ही इस व्यवसाय से दूर होते जा रहे हैं, वहीँ दूसरी ओर शहरों में ऐसी सुहावनी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं जहाँ जमीन के अभाव में लोग घर की छतों पर ही फसलें उगा रहे हैं। कौस्तभ और साहिल की मेहनत से एक बात तो सिद्ध हो गयी है की अगर हम वाकई कुछ करने का इरादा रखते हैं, तो हम सही दिशा चुनें, हमारी चाहतें ही अपने आप अपना रास्ता चुन लेंगी।
बिना खेतों के ही घर की छत पर उगा ली टनों सब्ज़ियाँ बिना खेतों के ही घर की छत पर उगा ली टनों सब्ज़ियाँ Reviewed by Shashi kumar on June 28, 2019 Rating: 5

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