140 से अधिक डिग्रियाँ लेकर बने डिग्रियों के शहंशाह

140 से अधिक डिग्रियाँ लेकर बने डिग्रियों के शहंशाह
पढ़ाई की टेंशन किसे नहीं होती, चाहे स्कूल हो या कॉलेज, पूरी तरह हम परीक्षाओं से घिरे होते हैं और अक्सर लोग चाहते भी यही हैं किबस किसी तरह जल्द से जल्द एक डिग्री मिल जाय ताकि नौकरी के रास्ते खुल जाएँ और अपनी जीवन यात्रा शुरू हो। लेकिन आज के इस दौर में चेन्नई के रहने वाले एक शक्श ऐसे हैं जिन्हें परीक्षाओं से कभी डर नहीं लगता। उलटे उन्हें ये चिंता होती है की उनसे कोई परीक्षा छूट न जाय। इसलिए आये दिन किसी न किसी परीक्षा की तैयारी में लगे होते हैं। उन्होंने BA, BCOM तो दूर, कई विषयों में मास्टर्स डिग्री के साथ PhD, MPhil समेत 140 डिग्रियाँ हासिल कर ली हैं। अपने इस विस्तृत ज्ञान के साथ अब तो ये दूसरों को विभिन्न विषयों में पढ़ाने भी लगे हैं। ये हैं डिग्रियों के शहंशाह वी.एन. प्रथिभान। उनसे पूछने पर उन्होंने बताया, जब उन्हें जब पहली डिग्री मिली तो इनके 59.99 प्रतिशत नम्बरों को देखकर इनकी माँ बहुत निराश हईं। इस बात ने इन्हें भी काफी दुखी कर दिया। उन्होंने उसी समय निश्चय किया की वे एक दिन अपनी माँ की इस निराशा को अवश्य दूर करेंगे। और उसी दिन से लग गए डिग्रियाँ बटोरने में। और 1981 से लगातार वे पूरी मेहनत और लगन से जुट गए विभिन्न विषयों की पढ़ाई में। आज ये आलम है की डिग्रियों का इनके घर जैसे भण्डार सा लग गया हो। इतनी सारी डिग्रियों को तो अब इन्हें सजाने तक की जगह नहीं मिल पाती है। परीक्षाएं देने का इनका ये सफर एक मोटिवेशन की तरह शुरू हुआ और अब तो ये इनका पैशन ही बन चुका है। अपनी पढ़ाई के लिए ये अपनी तनख्वाह का बहुत बड़ा हिस्सा खर्च कर देते हैं। अपने दिमाग को हमेशा तरोताज़ा रखने के लिए ये पढ़ने के साथ पढ़ाने का काम भी करते हैं। कई कॉलेजों में ये MBA, MPhil और PhD के छात्रों को अपना ज्ञान बांटते हैं। अपनी दिनचर्या ये सुबह 5 बजे शुरू करते हैं। नित्य कर्मों से निवृत्त होकर ये प्रातः 6 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक पढ़ाते हैं। उसके बाद शाम 4 बजे से फिर ये पढ़ाने के सिलसिला रात करीब 10 बजे ख़त्म होता है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे इनके पास अपने परिवार के लिए भी समय नहीं हैं। 2011 में हुए जनगणना के अनुसार भारत की जनसँख्या का केवल 8.15 प्रतिशत भाग ही ग्रेजुएट है। इसके विपरीत प्रथिभान जी के पास 140 से भी अधिक डिग्रियाँ हैं और फिर भी उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती। इनका तो कहना है इनके पास पैसों और समय कोई कमीं नहीं, और वे कभी भी इस काम से नहीं थकेंगे। अब तो डिग्रियाँ ही इन्हें पाकर अपनी आपको धन्य समझने लगी हैं।
140 से अधिक डिग्रियाँ लेकर बने डिग्रियों के शहंशाह 140 से अधिक डिग्रियाँ लेकर बने डिग्रियों के शहंशाह Reviewed by Shashi kumar on June 29, 2019 Rating: 5

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