जब बचपन था तो जवानी एक ख्वाब था | childhood life

जब बचपन था तो जवानी एक ख्वाब था
जब जवान हुए तो बचपन एक जमाना था
जब घर में रहते थे आज़ादी अच्छी लगती थी
आज आजादी है फिर भी घर जाने की जल्दी रहती है
कभी होटल में जाना पिज़्ज़ा बर्गर खाना पसंद था
आज घर पर आना और मां के हाथ का खाना पसंद है
स्कूल में जिनके साथ झगड़ते थे
आज उनको ही इंटरनेट पर तलाशते हैं
खुशी किस में होती है यह पता अब चला है
बचपन क्या था इसका एहसास अब हुआ है
काश तब्दील कर सकते हम जिंदगी के कुछ साल
काश जी सकते हम जिंदगी भरपूर एक बार
जब अपनी शर्ट में हाथ छुपाते थे और लोगों से कहते फिरते थे
देखो मैंने अपने हाथ जादू से गायब कर दिए
जब हमारे पास चार रंगों से लिखने वाली 
एक कलम हुआ करती थी
और हम सब के बटन को एक साथ दबाने की कोशिश किया करते थे
जब हम दरवाजे के पीछे छुपते थे ताकि अगर कोई आए
तो उसे डरा सके
जब आंख बंद करके सोने का ड्रामा करते थे
ताकि कोई हमें गोद में उठा कर बिस्तर तक पहुंचा दें
सोचा करते थे कि यह चांद हमारी साइकिल के पीछे पीछे क्यों चल रहा है
फल के बीज को इस डर से नहीं खाते थे कि कहीं हमारे पेट में पौधा ना उग जाए
जन्मदिन सिर्फ इस वजह से मनाते थे ताकि ढेर सारे तोहफे मिले
फ्रिज धीरे से बंद करके यह जानने की कोशिश करते थे कि उसकी रोशनी कब बंद होती हैं
सच बचपन में सोचते थे हम बड़े क्यों नहीं हो रहे हैं 
और अब सोचते हैं कि हम बड़े क्यों हो गए
जब बचपन था तो जवानी एक ख्वाब था 
जब जवान हुए तो बचपन एक जमाना था
जब बचपन था तो जवानी एक ख्वाब था | childhood life जब बचपन था तो जवानी एक ख्वाब था | childhood life Reviewed by Shashi Davel Official on August 05, 2018 Rating: 5

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