हमारे माता-पिता और उनकी हमसे उम्मीदें

नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है THEGOODSECRET.COM में, दोस्तों आज हम आपको कुछ अनोखी ही बात बताने वाले है हमारेे माता हमसे ज्यादा उम्मीद रखते हैं कभी-कभी यह उम्मीदें इतनी ज्यादा हो जाती है कि बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं

         आज की हमारी कहानी है ऐसी मां की है जो अपनी बेटी के साथ नौकरी के सिलसिले में महानगर में रहती थी और जब हर सुबह अपने ऑफिस जाती थी तो अपने बेटी से कहती थी बेटा तुम्हें इस साल टॉप करना है और जब मां दोपहर को फोन करती थी तब भी यही कहती थी की बेटी इस साल तुम्हें टॉप करना है और तो और शाम को खाना खाते समय भी हर बार यही कहती थी कि बेटी तुम्हें टॉप करना है समय गुजरता गया और समय एग्जाम (यानी परीक्षा) का समय आ चुका था एग्जाम के समय मां ने अपनी बेटी से पूछा कि बेटी तुम्हारे एग्जाम कैसे गुजर रहे हैं बेटी ने कहा मां एग्जाम बहुत अच्छे जा रहे हैं धीरे-धीरे समय गुजरता रहा और समय आया रिजल्ट (यानी परिणाम) का मां उस दिन बहुत ही ज्यादा एक्साइटेड (यानी उत्तेजित) थी ऑफिस जाने से पहले मां ने अपनी बेटी से कहा कि जैसे ही रिजल्ट आए तुम सबसे पहले मुझे फोन करना मां अपने ऑफिस में अपनी बेटी के फोन का इंतजार करने लगे लेकिन कोई फोन नहीं आया मां ने जैसे ही अपनी बेटी को फोन लगाया लेकिन बेटी ने फोन नहीं उठाया मां थोड़ी चिंतित हो गई मां ने फिर से फोन किया लेकिन बेटी ने फिर भी फोन नहीं उठाया मां और भी ज्यादा चिंतित हो गई मां ने दस पंद्रह बार फोन किया लेकिन बेटी ने फोन नहीं उठाया चिंतित होकर मां अपने ऑफिस से बाहर निकली और एक ऑटो किया और ऑटो में बैठ कर सोचने लगी कि बेटी को क्या हुआ होगा वह यही सोच सोच कर रोने लगी कि मेरी बेटी को क्या हुआ होगा कहीं वह फेल तो नहीं हो गई इस चिंता में वह घर पहुंची घर में पहुंची तो देखा कि वहां बेटी नहीं थी पूरे घर में तलाशा लेकिन उनकी बेटी नहीं मिली मैं और रोने लगी और परेशान होने लगी जाकर एक सोफे पर बैठ गई सामने एक मेज पड़ा हुआ था उस पर एक पत्र पड़ा था मां ने इस पत्र को देखा उसे उठाया और पढ़ने लगी उस पत्र में लिखा हुआ था-
              "मां मैं फेल हो गई मैं घर छोड़कर जा रही हूं मैं बहुत परेशान हो गई हूं कभी भी आपने मुझसे यह नहीं पूछा कि तेरी तबीयत कैसी है कभी भी आपने मुझसे यह नहीं पूछा कि तूने खाना खाया कि नहीं खाया, तुम कैसे हो तुम्हें किसी चीज की जरूरत तो नहीं है आप हमेशा यह कहती थी कि तुम्हें टॉप करना है तो मैं टॉप करना है आज मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई हूं मैं फेल हो गई हूं और मैं आज आपके घर को छोड़कर जा रही हूं" मां बहुत ज्यादा परेशान होने लगी रोने लगी आंसू टपक रहे थे लेकिन फिर भी मैं उसका खूब पढ़ रही थी आगे उस खत में लिखा हुआ था कि मां ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ जा रही हूं हमारा बहुत समय से रिश्ता था अपने बॉयफ्रेंड के साथ, और आपको यह जानकर बहुत ही खुशी होगी कि आप कुछ ही समय में नानी बनने वाली हो और मैं मां बनने वाली हूं इस बात को पढ़कर मां सहम गई और रोने लगी और पत्र को पढ़ने लगी मां बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी थी और धीरे-धीरे करके पत्र खत्म हो चुका था उस खत के पीछे एक नोट लिखा हुआ था उस नोट को पढ़कर मां और भी ज्यादा आश्चर्यचकित हो गई और भी ज्यादा रोने लगी उस नोट में लिखा हुआ था कि मां मैं कहीं नहीं भागी हूं मैं पड़ोस वाली आंटी के घर में बैठी हूं और आप जब इस खत को पढ़ ले तुम मुझे वहां से बुला लेना मैं मां भी नहीं बनने वाली हूं और मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है और आपको यह जानकर और भी ज्यादा खुशी होगी कि मैंने टॉप किया है मैं सिर्फ आपको यह समझाना चाहती थी कि मैं आपका समय चाहती हूं मैं आपके साथ रहना चाहती हूं मैं आपके साथ घूमने जाना चाहती हूं लेकिन आपके पास मेरे लिए समय नहीं है आप सिर्फ यह चाहती थी मैं टॉप करूं और मैं सिर्फ यह चाहती थी कि आप मेरे लिए समय निकालें ऐसे ही हम सब अपने माता-पिता का समय चाहिए मां पत्र को पढ़कर  फूट-फूट कर रोने लगी लेकिन हमारे माता पिता चाहते हैं कि हम टॉप करें कुछ बने हैं आगे बढ़ें कुछ कर दिखाए लेकिन हमारे माता पिता भी सही है क्योंकि वह सिर्फ हमारे और हमारे भविष्य के बारे में ही सोचते हैं
आपको क्या लगता है कि आपके माता पिता आपको समय देते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं क्योंकि हम आपकी राय का सम्मान करते हैं जय हिंद !!
हमारे माता-पिता और उनकी हमसे उम्मीदें हमारे माता-पिता और उनकी हमसे उम्मीदें Reviewed by Raaj kumar on August 03, 2018 Rating: 5

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