आंसू जिन्हें कोई नहीं रोक सकता


बचपन से लेकर जवानी तक आपको इस समाज में एक बात बताई है और एक बात छुपाई है क्योंकि बताई गई बात से उन्हें मजबूत होने का और मर्द होने का एहसास होता है और ना बताई गई बात से कमजोरी का, लेकिन सच्चाई वो नहीं है जो आपको दिखाई जा रही है- सच्चाई वह है जो आप देख ही नहीं पा रहे, आप सिर्फ एक फिल्म को देखकर सारी चीजों का अनुमान लगाने वाले इंसान हैं यदि आप एक बार सिर्फ एक बार उस फिल्म को बनाने वाले हजारों लोगों के पीछे की कहानी देख ले तो आपकी भी सोचने का नजरिया बदल जाएगा, 99% बात हम वह बोलते हैं जो हमने दूसरों से सुना है वह नहीं जो हमने खुद ने देखा हो या फिर उसे महसूस किया हो,
   खुद ही सोच कर देखिए गाल पर मारे गए तमाचे का एहसास आपको कब होगा जब वह दूसरों के गाल पर पड़ेगा तब जब खुद के गाल पर पड़ेगा तब, इस समाज ने बचपन से आपको एक बात सुनाई है कि रोने वाला इंसान कमजोर होता है लेकिन यह बात सच नहीं है और मर्दों की रोने पर तो जैसे रोक लगी हुई है अगर कोई मर्द रोया तो उसके मर्द होने पर शंका की जाती है समाज ने हमें यह बताया कि ना रोना मर्द होने की निशानी है लेकिन उन्होंने हम से यह छुपाया कि रोने से क्या हो जाएगा क्योंकि उन्हें खुद भी नहीं पता, रोने से ना तो कोई मर्द होता है या ना ही कोई औरत यह तो अंदर भरे गुफार को बाहर निकालने की एक सामान्य सी क्रिया है जो हर इंसान अपना सकता है जिससे मन हल्का महसूस करता है,
         रोने ना तो अच्छा है और ना ही बुरा लेकिन यह ऐसी एक प्रक्रिया है जिसके पास आप जिंदगी की दूसरी पारी खेलने के लिए तैयार हो जाते हैं यदि रोना आ रहा है तो रो, उसे रोको मत और ना ही उसे एक दिखाबे की तरह प्रयोग करो किसी की सहानुभूति पाने के लिए मत रो और ना ही किसी को दिखाने के लिए रो, आप रोइए क्योंकि आप को रोने के बाद अच्छा महसूस होता है लेकिन फिर तैयार रहिए जिंदगी की दूसरी पारी खेलने के लिए, क्या आप सभी तैयार हैं तो मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं
आंसू जिन्हें कोई नहीं रोक सकता आंसू जिन्हें कोई नहीं रोक सकता Reviewed by Shashi kumar on August 01, 2018 Rating: 5

No comments:

आपको हमारा कंटेंट कैसा लगा कृपया अपनी राय जरुर दें क्योंकि हम आपकी राय का सम्मान करते हैं धन्यवाद

Powered by Blogger.